“समय”

 


“समय”


कभी-कभी लगता है

समय हमारे पास बैठकर

हमारी ही बातें सुनता रहता है,

जैसे कोई धैर्यवान बुज़ुर्ग

जिसे पता है

कि हर जल्दी

अंत में जाकर धीमी पड़ ही जाती है।


मैं जब घड़ी की टिक-टिक सुनता हूँ,

तो लगता है

वह सलाह नहीं दे रही,

बस याद दिला रही है

कि जीवन का हर पल

एक छोटे से बीज की तरह है,

जो सही धरती पाते ही

किसी न किसी रूप में उग ही जाएगा।


समय कभी दबाव नहीं डालता

हम ही उसे कसकर पकड़ लेते हैं

जैसे वो भाग जाएगा।

पर सच यह है,

समय कभी भागता नहीं,

वह तो हमें हमारी भूलों से आगे बढ़ाता है

और हमारी समझ तक ले जाता है।


मैं कभी-कभी

अपनी पुरानी नोटबुक पलटता हूँ

लिखा कुछ खास नहीं होता,

लेकिन उनके बीच

मेरे बदलते हुए मौसम

एक-एक पन्ने में सांस लेते दिखते हैं।


समय की यही खूबसूरती है

वह हमें धीरे-धीरे

हमारे ही भीतर से निकालकर

हमारे नए रूप से मिलवाता है।


कभी वह सिखाता है

कि देर होना गलत नहीं,

बेकार में जल्दी करना गलत है।

कभी वह बताता है

कि कुछ रास्ते इंतज़ार मांगते हैं

और कुछ,

सिर्फ एक अलग निगाह।


कभी लगता है

समय ने अपने हाथ में

कोई डोर पकड़ी हुई है

जिसके सहारे

वह हमें धीरे से खींचता है

ताकि हम वहां पहुँचें

जहाँ हमें होना चाहिए,

ना उससे पहले,

ना उसके बाद में।


मैं धीरे से खिड़की के पार देखता हूँ

धूप को पेड़ों के बीच फैलते हुए,

और समझ जाता हूँ

कि समय भी धूप जैसा है

किसी एक जगह रुककर

किसी एक चेहरे पर नहीं रहता,

वह हर जगह फैलता है

और हर किसी को

उनकी अनुकूल गर्माहट देकर आगे बढ़ता है।


और उस पल

मैं समय से कहना चाहता हूँ—

“तेरी चाल ठीक है,

बस मुझे ही

अपने कदमों की जल्दबाज़ी कम करनी है।”


क्योंकि सच यही है

समय बदलता नहीं,

हम बदलते हैं।

और उसका सौंदर्य

यही है

कि वह हर बदलाव को

जीवन का

एक नया अर्थ दे जाता है।


                                                 - RavindraGangwar 






FOLLOW FOR MORE


Comments