“निर्णय”

“निर्णय”


हमारी ज़िंदगी में

हर दिन 

कोई न कोई मोड़ आता है

कभी बड़ा,

तो कभी इतना छोटा

कि हम उसे मोड़ समझते भी नहीं।


पर सच कहूँ तो

हर मोड़ में एक छोटी-सी लौ छिपी होती है,

जो यह जानने का इंतज़ार करती है

कि हम किस ओर चलेंगे।


निर्णय लेना

हमेशा हिम्मत का काम नहीं होता

कभी-कभी बस विश्वास का काम होता है,

कि भले ही रास्ता लंबा हो,

हम कदम-दर-कदम

चल सकेंगे।


मैंने देखा है

कि कई बार हम फैसले नहीं लेते,

हम सिर्फ उनसे डरते हैं,

क्योंकि हमें लगता है

कि गलत चुन लेंगे।


पर जीवन की सबसे सुंदर बात यही है

कि गलत रास्ते भी

किसी न किसी नए दृश्य तक ले ही जाते हैं।


कभी मैं बैठकर सोचता हूँ

आख़िर फैसलों में इतना वजन क्यों होता है?

तो अंदर से एक आवाज आती है

“क्योंकि तू उन्हें

अपनी दिशा का मालिक बना देता है,

ना कि अपना साथी।”


और इस बात में

एक गहरा सत्य छिपा है।


निर्णय साथी होते हैं

रास्ता दिखाते हैं,

पर हमें चलना

अपने कदमों से ही पड़ता है।


मैंने आज एक छोटा-सा फैसला लिया

जो शायद किसी को बड़ा न लगे,

पर मेरे अंदर 

उसने हल्की-सी रोशनी जगा दी।


एक रोशनी

जो कहती है

कि आगे जाने के लिए

पूरा नक्शा जरूरी नहीं,

बस पहला कदम जरूरी है।


और उस कदम में

एक अजीब-सी स्वतंत्रता है

जैसे हवा में खुली बाँहें,

जैसे बारिश में पहला क़तरा,

जैसे किसी नए मौसम का

अपने नाम पुकारना।


निर्णय लेना

परिपक्वता नहीं,

साहस नहीं,

ये एक विश्वास है

कि चाहे जो हो,

हम खुद को संभाल लेंगे।


और मैंने जाना

कि जीवन में सबसे रोशन क्षण

तभी आते हैं

जब हम तय करते हैं

कि हमें वहीं रहना है

जहाँ दिल कहता है,

और वहाँ नहीं

जहाँ डर भेजता है।


आज का मेरा फैसला छोटा था

पर मैंने महसूस किया

कि अंदर की वो छोटी-सी लौ

थोड़ी और तेज़ हो गई है…


और शायद

यही तो सबसे बड़ा निर्णय था।


-RavindraGangwar 



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